देहरादून। ग्राफिक एरा में विधि विशेषज्ञों ने कहा कि बदलते दौर की आवश्यकताओं को देखते हुए एआई और कानून, लीगल टेक्नोलॉजी, डेटा संरक्षण और डिजिटल गवर्नेंस जैसे उभरते क्षेत्रों को विधि पाठ्यक्रम का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए। आज ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ लॉ को बोर्ड ऑफ स्टडीज़ की बैठक में देश के प्रतिष्ठित विधि विशेषज्ञों ने भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप विधि शिक्षा को आधुनिक बनाना समय की आवश्यकता बताया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता ने कहा कि विश्वविद्यालयों का उद्देश्य केवल कानून की डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे सक्षम, नैतिक और व्यावहारिक दृष्टि से दक्ष अधिवक्ता तैयार करना होना चाहिए, जो न्याय व्यवस्था की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हों।
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड आर.एच.ए. सिकंदर ने कहा कि मुकदमेबाजी के क्षेत्र में ड्राफ्टिंग, शोध और न्यायालय में प्रभावी पैरवी जैसे व्यावहारिक कौशल अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। छात्र छात्राओं को सिम्युलेटेड कोर्ट कार्यवाही, केस विश्लेषण तथा अधिवक्ताओं एवं न्यायाधीशों के साथ नियमित संवाद के अवसर मिलने चाहिए। वाडिया गांधी एंड कंपनी, नई दिल्ली के पार्टनर चिरंजीवी शर्मा ने कहा कि डिजिटल परिवर्तन के दौर में विधिक क्षेत्र की अपेक्षाएँ तेजी से बदल रही हैं। इसके अनुरूप कॉर्पोरेट कंप्लायंस, कॉन्ट्रैक्ट ड्राफ्टिंग जैसे विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की आवश्यकता है।
बोर्ड ऑफ स्टडीज की इस बैठक को लखनऊ की डा. राम मनोहर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के कुलपति डा. ए. पी. सिंह , हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ लॉ की डीन डा. ममता राणा और देहरादून के डीएवी (पीजी) कॉलेज के लॉ डिपार्टमेंट की हेड डा. पारुल दीक्षित ने भी ऑनलाइन माध्यम से संबोधित किया। बैठक में ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ लॉ के हेड डा. आशुतोष हजेला के साथ डा. शैलजा ठाकुर , डा. समता कथूरिया और अन्य शिक्षक शिक्षिकाएं मौजूद रहे।
