देहरादून। ग्राफिक एरा में विशेषज्ञों ने कहा कि एआई की वास्तविक सफलता मानव बुद्धिमत्ता का विकल्प बनने में नहीं, बल्कि उसे सशक्त बनाने में है। मानव की रचनात्मकता और एआई की विश्लेषणात्मक क्षमता का समन्वय तकनीकी विकास को अधिक प्रभावी और समाजोपयोगी बना सकता है। ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में ऑटोमेशन और कंप्यूटेशन पर तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ‘ऑटो-कॉम 2026’ का आयोजन किया गया। सम्मेलन के समापन समारोह में मुख्य अतिथि जेएनयू के प्रोफेसर डा. डी. के. लोबियाल ने कहा कि आधुनिक युग में एआई की प्रगति के साथ यह समझना भी जरूरी है कि मशीनों की क्षमताएं और मानव बुद्धिमत्ता किस प्रकार एक-दूसरे की पूरक बन सकती हैं।
एआई सूचनाओं के विश्लेषण और पैटर्न पहचानने में प्रभावी है, लेकिन मानवीय संवेदनाएं, नैतिक विवेक, सामाजिक परिस्थितियों की समझ और जिम्मेदारी के साथ निर्णय लेने की क्षमता तकनीकी विकास में आज भी विशेष महत्व रखती है। कुलपति डा. तब्बसुम नकवी ने कहा कि ऑटोमेशन और कंप्यूटेशन के साथ एआई का एकीकरण स्मार्ट शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और शोध की नई दिशाओं को गति दे रहा है। ऐसे में भविष्य की तकनीक विकसित करने के साथ-साथ युवाओं को एआई की क्षमताओं, सीमाओं और जिम्मेदार उपयोग की समझ देना भी आवश्यक है। डीईएएल, डीआरडीओ के वैज्ञानिक डा. राकेश भारद्वाज ने डिफेंस के क्षेत्र में डिजिटल ट्विन रेफरेंस आर्किटेक्चर की कार्यप्रणाली और उपयोगिता की जानकारी दी।
इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट ने किया। सम्मेलन में कन्वीनर डा. विक्रांत शर्मा और डा. अमित गुप्ता, पुरुषोत्तम दास अन्य शिक्षक शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं शामिल हुए।

