देहरादून। जब हम मानसून के दौरान होने वाली बीमारियों के बारे में सोचते हैं, तो आमतौर पर डायरिया, डेंगू, वायरल बुखार और दूसरे इन्फेक्शन का ख्याल आता है। हम शायद ही यह कभी सोचते हैं कि मानसून के दौरान किडनी को भी खतरा रहता है। बता दें कि बारिश के मौसम में डिहाइड्रेशन, पेट और आंतों के इन्फेक्शन, दूषित पानी, कुछ खास तरह के इन्फेक्शन और दवाओं के गलत इस्तेमाल से किडनी को गंभीर खतरा हो सकता है। यह बात इस मॉनसून में देहरादून और उसके आसपास के इलाकों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है।
रिसर्च से मानसून में होने वाले संक्रमणों (इंफेक्शंस) और एक्यूट किडनी इंजरी के बीच स्पष्ट संबंध का पता चला है। मानसून के दौरान इन्फेक्शन वाली बीमारियों पर भारत में की गई एक स्टडी में इन्फेक्शन की वजह से भर्ती हुए 13.21% मरीज़ों में AKI पाया गया। इन्फेक्शन से जुड़े AKI के मामलों में 23% मामले एक्यूट गैस्ट्रोएंटेराइटिस के थे, 16.5% डेंगू के और 13% लेप्टोस्पायरोसिस के थे। लगभग 48% मरीज़ों में गंभीर स्टेज III का AKI था और करीब 45% को डायलिसिस की ज़रूरत थी। कुल मृत्यु दर 12.17% थी। इन आंकड़ों का मतलब यह नहीं है कि हर डायरिया या डेंगू से ग्रसित मरीज को किडनी की समस्या होगी।
इस स्टडी में सिर्फ़ उन्हीं मरीज़ों को शामिल किया गया था जिनकी हालत इतनी गंभीर थी कि उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती करने की ज़रूरत पड़ी। हालांकि, इससे पता चलता है कि मॉनसून के दौरान गंभीर इन्फेक्शन और डिहाइड्रेशन से कभी-कभी किडनी को गंभीर नुकसान हो सकता है। डायरिया के दौरान हुई एक और स्टडी में पाया गया कि हॉस्पिटल में भर्ती गंभीर डायरिया वाले लगभग 10% वयस्कों में AKI (एक्यूट किडनी इंजरी) की समस्या देखी गई। इनमें से कई मरीज़ गंभीर रूप से बीमार थे और लगभग एक-तिहाई मरीज़ों को डायलिसिस की ज़रूरत थी।
उत्तराखंड जल संस्थान के डेटा के अनुसार मौजूदा मानसून और उससे जुड़ी आपदाओं के दौरान पूरे उत्तराखंड में पीने के पानी की सप्लाई की 424 योजनाएं प्रभावित हुईं। इनमें से 104 योजनाएं देहरादून में हैं। भारी बारिश, भूस्खलन, बाढ़ और पाइपलाइन के खराब होने से पानी की सप्लाई में रुकावट आ सकती है और पानी के दूषित होने का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि दूषित पानी का सीधा मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को किडनी की चोट (किडनी इंजरी) हो जाएगी। हालांकि इससे समस्याओं का एक सिलसिला शुरू हो सकता है: जैसे कि नीचे दर्शाया गया है— असुरक्षित पानी → दस्त/उल्टी → पानी और लवणों (साल्ट्स) की कमी → डिहाइड्रेशन और कम ब्लड प्रेशर → किडनी तक खून का बहाव कम होना → एक्यूट किडनी इंजरी
एक्यूट किडनी इंजरी का मतलब किडनी के काम करने की क्षमता में अचानक कमी आना, जो कुछ घंटों या दिनों में हो सकती है। आम तौर पर किडनी खून से गंदगी को बाहर निकालती है और शरीर में पानी, नमक और एसिड का संतुलन बनाए रखती है। लेकिन बहुत ज़्यादा डिहाइड्रेशन, इन्फेक्शन, कम ब्लड प्रेशर या कुछ दवाएं अचानक किडनी के काम पर असर डाल सकती हैं। इसके कारण शरीर में गंदगी और अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा हो सकते हैं।
आरजी हॉस्पिटल्स, देहरादून के नेफ्रोलॉजी कंसल्टेंट डॉ भाविन ब्रह्मभट्ट ने कहा, “मानसून के दौरान डिहाइड्रेशन, डायरिया और इन्फेक्शन से किडनी पर बहुत ज़्यादा दबाव पड़ सकता है और गंभीर मामलों में इससे अचानक किडनी को चोट (एक्यूट किडनी इंजरी) लग सकती है। लोगों को सुरक्षित पानी पीकर शरीर में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए, बिना ज़रूरत के पेनकिलर लेने से बचना चाहिए, और अगर पेशाब कम हो या डिहाइड्रेशन के लक्षण बने रहें, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।”
