देहरादून। राजधानी देहरादून के दून विहार, बापूनगर और जाखन क्षेत्र में बुधवार को हुई मूसलाधार बारिश के बाद वर्षों पुरानी जर्जर सीवर लाइन के ओवरफ्लो(Dehradun Sewer Crisis) होने से गंभीर जलभराव और स्वच्छता संकट उत्पन्न हो गया। सीवर का गंदा पानी सड़कों से होते हुए सैकड़ों घरों में घुस गया, जिससे क्षेत्रवासियों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, बारिश के दौरान सीवर लाइन अपनी क्षमता से अधिक दबाव झेलने में असफल रही, जिसके चलते गंदा पानी और मल-मूत्र घरों के भीतर तक पहुंच गया। इससे फर्नीचर, राशन और अन्य घरेलू सामान को भारी नुकसान हुआ है।
600 से अधिक परिवारों की जलापूर्ति प्रभावित
Dehradun Sewer Crisis स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब बापूनगर क्षेत्र में पेयजल लाइन भी क्षतिग्रस्त हो गई। इससे 600 से अधिक परिवारों की जलापूर्ति बाधित हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सीवर का पानी पेयजल लाइनों में मिलने की आशंका के चलते डायरिया, पीलिया और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
बदबू और गंदगी से लोगों का जीना हुआ मुश्किल
Dehradun Sewer Crisis: क्षेत्र में फैली गंदगी और दुर्गंध के कारण बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई घरों में रहने वाले लोग स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बीच दिन गुजारने को मजबूर हैं।
₹1370.97 लाख की सीवर परियोजना अब भी स्वीकृति की प्रतीक्षा में
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तराखण्ड जल संस्थान द्वारा दून विहार-जाखन क्षेत्र की पुरानी सीवर लाइन को बदलने के लिए ₹1370.97 लाख (करीब ₹13.70 करोड़) का प्राक्कलन तैयार कर शासन को भेजा जा चुका है। हालांकि पांच माह बीत जाने के बावजूद इस योजना को अभी तक प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति नहीं मिल सकी है।
शासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग(Dehradun Sewer Crisis)
क्षेत्र की गंभीर स्थिति को देखते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधि ने सचिव, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, उत्तराखण्ड शासन को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप और परियोजना को शीघ्र स्वीकृति देने की मांग की है। उनका कहना है कि मानसून शुरू होने से पहले सीवर लाइन बदलने का कार्य शुरू नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में स्थिति और विकट हो सकती है।
जनप्रतिनिधि का बयान
जनप्रतिनिधि ने Dehradun Sewer Crisis परकहा,
“40 साल पुरानी सीवर लाइन अब हर बारिश में क्षेत्रवासियों के लिए अभिशाप बन चुकी है। लोग अपने ही घरों में गंदगी के बीच रहने को मजबूर हैं। शासन से आग्रह है कि इस अत्यावश्यक जनहित परियोजना को तत्काल स्वीकृति प्रदान कर कार्य शुरू कराया जाए। मानसून सिर पर है और देरी होने पर हालात और भयावह हो सकते हैं।”
