देहरादून। रेसकोर्स स्थित श्री गुरु नानक मैदान में आयोजित ऐतिहासिक ‘भव्य रामलीला महोत्सव-2026’ का पंचम दिवस हिमालय संरक्षण दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर केवट लीला और राम-भरत मिलाप के भावपूर्ण मंचन ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। वहीं, प्रसिद्ध गढ़वाली लोकगायक रोहित चौहान की पुरानी टिहरी के दर्द को बयां करती गीतात्मक प्रस्तुति ‘ऐ विधाता मेरी पितरों की बसाई, टिहरी…’ ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं। कार्यक्रम में पंचायती राज मंत्री मदन कौशिक, देहरादून के महापौर सौरभ थपलियाल और पूर्व विधायक राजकुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस दौरान धार्मिक आस्था, उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।
केवट लीला और राम-भरत मिलाप ने मोहा मन
रामलीला के मंचन में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण की वनयात्रा के दौरान केवट प्रसंग को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया। नाव, सरयू नदी की पृष्ठभूमि और आधुनिक तकनीकी प्रभावों के माध्यम से मंचन को जीवंत बनाया गया। ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो दर्शक स्वयं इस पौराणिक प्रसंग के साक्षी हों।
इसके बाद राम-भरत मिलाप के मार्मिक दृश्य ने पूरे पंडाल को भावुक कर दिया। भरत का भगवान श्रीराम के प्रति प्रेम, त्याग, समर्पण और भ्रातृभाव मंचन का प्रमुख आकर्षण रहा। कलाकारों की प्रभावशाली प्रस्तुति पर दर्शकों ने सराहना की।
रोहित चौहान के गीत ने याद दिलाई पुरानी टिहरी
प्रसिद्ध गढ़वाली लोकगायक रोहित चौहान ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति से कार्यक्रम में लोकसंस्कृति के रंग भर दिए। पुरानी टिहरी के जलमग्न होने की पीड़ा और पूर्वजों की बसाई धरती से जुड़ी भावनाओं को व्यक्त करने वाले उनके गीत ‘ऐ विधाता मेरी पितरों की बसाई, टिहरी…’ ने उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया। गीत के माध्यम से पुरानी टिहरी की यादें और वहां से जुड़ी लोगों की भावनाएं एक बार फिर जीवंत हो उठीं।
हिमालय संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी : अभिनव थापर
समिति के अध्यक्ष अभिनव थापर ने कहा कि हिमालय केवल पर्वत श्रृंखला नहीं, बल्कि उत्तराखंड की पहचान, जीवनरेखा और सांस्कृतिक विरासत है। इसका संरक्षण करना, वनों को बचाना, अधिक से अधिक पौधे लगाना और अपनी लोकसंस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि रामलीला जैसे सांस्कृतिक आयोजन लोगों को धार्मिक आस्था से जोड़ने के साथ-साथ प्रकृति और पर्यावरण के प्रति अपने दायित्वों का बोध भी कराते हैं।
पंचायती राज मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि रामलीला जैसे आयोजन धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और भारतीय परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के साथ नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। महापौर सौरभ थपलियाल ने कहा कि सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना समय की आवश्यकता है। हिमालय की प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखना सभी का दायित्व है।
पूर्व विधायक राजकुमार ने कहा कि पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला की परंपरा को देहरादून में जीवंत रखना उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का सराहनीय प्रयास है।
1952 से जुड़ी है ऐतिहासिक रामलीला की परंपरा
उल्लेखनीय है कि श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून (पंजीकृत) द्वारा आयोजित इस रामलीला की परंपरा वर्ष 1952 में पुरानी टिहरी से शुरू हुई थी। टिहरी के जलमग्न होने के बाद इस ऐतिहासिक परंपरा को देहरादून में पुनर्जीवित कर आगे बढ़ाया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, वर्ष 2025 में इस रामलीला का डिजिटल एवं अन्य माध्यमों से 85 लाख से अधिक दर्शकों तक पहुंचना इसकी लोकप्रियता का प्रमाण रहा। वर्ष 2026 में डिजिटल प्रसारण के माध्यम से एक करोड़ से अधिक दर्शकों तक पहुंचने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
कार्यक्रम में ग्रीन बैंक के संस्थापक चंदन सिंह नेगी के प्रयासों की भी सराहना की गई। उनके द्वारा लोगों की सहभागिता से पौधे उपलब्ध कराने और पौधारोपण को जन-अभियान बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। वहीं, लोकगायक रोहित चौहान को गढ़वाली भाषा, लोकधुनों और उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए सराहा गया। इस अवसर पर शिवसेना के प्रदेश अध्यक्ष गौरव कुमार, यूकॉस्ट के पूर्व निदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल, कांग्रेस के राष्ट्रीय संचार सचिव वैभव वालिया, राज्य आंदोलनकारी मोहन सिंह खत्री सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। सभी अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान किया गया।
25 अक्टूबर तक चलेगा महोत्सव
समिति की ओर से आयोजित भव्य रामलीला महोत्सव-2026 का आयोजन 8 से 25 अक्टूबर तक श्री गुरु नानक मैदान, रेसकोर्स, देहरादून में किया जा रहा है। रामलीला का मंचन 11 से 21 अक्टूबर तक निर्धारित है। आयोजन के कार्यक्रम के अनुसार, 20 अक्टूबर को रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाएगा, जबकि 21 अक्टूबर को भगवान श्रीराम का राजतिलक होगा।

