टिहरी: प्रभारी जिलाधिकारी वरुणा अग्रवाल की अध्यक्षता में विकास भवन कार्यालय में मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार के लिए प्राप्त आवेदनों के सत्यापन एवं नामों की संस्तुति के संबंध में बैठक आयोजित की गई। उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारी को निर्देश दिए कि पुरस्कार के लिए प्राप्त आवेदनों का भौतिक सत्यापन कराया जाए। इसके लिए बाल विकास, पुलिस, बाल कल्याण समिति और परिवीक्षा विभाग के एक-एक सदस्य की टीम गठित कर सत्यापन रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।
रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद बैठक कर पात्र बच्चों के नामों पर निर्णय लिया जाएगा। बैठक में बताया गया कि उत्तराखंड सरकार द्वारा असाधारण साहस और वीरता का परिचय देने वाले बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार शुरू किया गया है। पुरस्कार के तहत चयनित बच्चे को 51 हजार रुपये की नकद धनराशि, पदक एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। यह पुरस्कार प्रतिवर्ष राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर दिया जाएगा।
बैठक में बताया गया कि पुरस्कार के लिए घटना के समय 6 वर्ष से अधिक और 18 वर्ष से कम आयु के ऐसे बच्चे पात्र हैं, जिन्होंने पिछले दो वर्षों के दौरान असाधारण साहस, वीरता अथवा मानवीय संवेदना का परिचय दिया हो। किसी की जान बचाने, संकट में दूसरों की सहायता करने तथा विपरीत परिस्थितियों में साहस और सूझबूझ से उल्लेखनीय कार्य करने वाले बच्चों के नाम पर विचार किया जा सकता है। योजना के तहत प्रत्येक जिले से एक बच्चे का चयन किए जाने का प्रावधान है।
जिला स्तर पर आवेदनों एवं घटनाओं का सत्यापन करने के बाद राज्य स्तरीय समिति अंतिम चयन करेगी। बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी संजय गौरव, जिला परिवीक्षा अधिकारी ज्योति पटवाल, जिला शिक्षा अधिकारी मो. तसलीम कुरैशी, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष ऋषि कुमार, पुलिस विभाग से अजय कुमार, बाल कल्याण समिति से संगीता भंडारी सहित अन्य संबंधित कर्मचारी उपस्थित रहे।

