देहरादून: सहकार भारती उत्तराखण्ड द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘श्रद्धेय लक्ष्मणराव इनामदार एम-पैक्स नेतृत्व प्रशिक्षण कार्यक्रम’ का शनिवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। प्रशिक्षण वर्ग में गढ़वाल मंडल के सात जनपदों की 54 बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों (एम-पैक्स) के नव-निर्वाचित अध्यक्षों, सचिवों एवं पदाधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर सहकारिता के सिद्धांतों, नेतृत्व विकास, सहकारी कानूनों, वित्तीय प्रबंधन, सुशासन, डिजिटल कार्यप्रणाली तथा केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य एम-पैक्स को केवल ऋण वितरण तक सीमित न रखकर उन्हें ग्रामीण विकास, कृषि उन्नयन, स्वरोजगार, महिला सशक्तिकरण, डेयरी, उद्यान, खादी एवं ग्रामोद्योग तथा स्थानीय आर्थिक गतिविधियों का सशक्त केंद्र बनाना था। प्रशिक्षण वर्ग में विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर व्यावहारिक जानकारी देते हुए पदाधिकारियों को संस्थाओं के कुशल संचालन एवं पारदर्शी प्रबंधन के गुर सिखाए।
दूसरे दिन के प्रथम सत्र की अध्यक्षता उत्तराखण्ड सरकार के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री श्री गणेश जोशी ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सहकारिता भारत की सांस्कृतिक एवं आर्थिक परंपरा का महत्वपूर्ण आधार है और प्रधानमंत्री के “सहकार से समृद्धि” के संकल्प को साकार करने में एम-पैक्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में सहकारी संस्थाएं रीढ़ का कार्य करती हैं और सरकार इन संस्थाओं को आधुनिक संसाधनों तथा नई योजनाओं से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एम-पैक्स को बीज वितरण, उर्वरक उपलब्ध कराने, कृषि यंत्रों की आपूर्ति, भंडारण व्यवस्था, डेयरी विकास, प्राकृतिक खेती तथा कृषि उत्पादों के विपणन जैसी गतिविधियों से जोड़कर उन्हें बहुआयामी संस्थाओं के रूप में विकसित कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि सहकारी समितियां पूरी पारदर्शिता, ईमानदारी और सेवा भावना के साथ कार्य करें तो गांवों के आर्थिक और सामाजिक विकास में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने सभी पदाधिकारियों से किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सहकारिता की मूल भावना के अनुरूप कार्य करने का आह्वान किया।
प्रशिक्षण वर्ग के समापन सत्र की अध्यक्षता ग्रामीण विकास, लघु एवं सूक्ष्म-मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्राम उद्योग तथा भाषा मंत्री श्री भरत सिंह चौधरी ने की। उन्होंने कहा कि सहकारिता और ग्रामीण विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। जब सहकारी संस्थाएं मजबूत होंगी, तभी गांव आत्मनिर्भर बनेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण वर्ग नव-निर्वाचित एम-पैक्स पदाधिकारियों के लिए केवल प्रशिक्षण का मंच नहीं, बल्कि भविष्य के नेतृत्व निर्माण का सशक्त माध्यम है। यहां प्राप्त ज्ञान, अनुभव और मार्गदर्शन निश्चित रूप से समितियों के प्रभावी संचालन में सहायक होगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, स्वरोजगार, लघु उद्योग, खादी एवं ग्रामोद्योग तथा सहकारिता के बीच समन्वय स्थापित कर किसानों और ग्रामीण युवाओं की आय बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशिक्षित पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में सहकारिता को जनआंदोलन का स्वरूप देंगे। कार्यक्रम में विशेषज्ञ वक्ता एवं एडिशनल निबंधक, सहकारी समितियां सुश्री इरा उप्रेती ने सहकारी समितियों के प्रभावी संचालन पर विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि सहकारी अधिनियम एवं आदर्श उपविधियों का शत-प्रतिशत पालन किसी भी संस्था की सफलता की पहली शर्त है।
उन्होंने कहा कि पारदर्शी कार्यप्रणाली, वित्तीय अनुशासन, समय पर लेखा परीक्षण, डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन, सदस्यों की सक्रिय भागीदारी तथा जवाबदेही से ही सहकारी संस्थाओं की विश्वसनीयता बढ़ती है। उन्होंने कहा कि एम-पैक्स को आधुनिक तकनीकों के अनुरूप कार्य करना होगा ताकि किसानों को सभी सेवाएं सरलता और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई जा सकें। विभाग की ओर से सभी समितियों को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन एवं सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। सहकार भारती उत्तराखण्ड के प्रदेश अध्यक्ष श्री विनोद गौड़ ने कहा कि सहकार भारती का उद्देश्य सहकारिता को समाज जीवन का सशक्त माध्यम बनाना है।
उन्होंने बताया कि इस नेतृत्व प्रशिक्षण वर्ग में नव-निर्वाचित पदाधिकारियों को सहकारिता के इतिहास, सिद्धांत, संगठनात्मक संरचना, सहकारी कानून, नेतृत्व क्षमता, वित्तीय प्रबंधन, डिजिटल प्रणाली, सरकारी योजनाओं तथा ग्राम विकास में एम-पैक्स की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया।उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में एम-पैक्स की भूमिका लगातार बढ़ रही है और सरकार की अनेक योजनाओं का लाभ गांव-गांव तक पहुंचाने में इन समितियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे में प्रशिक्षित नेतृत्व ही सहकारिता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।
कार्यक्रम में प्रदेश संगठन प्रमुख राजेश वर्मा, प्रदेश सह संगठन प्रमुख मणिराम नौटियाल, प्रदेश कोषाध्यक्ष सुधीर कुमार जोशी, प्रदेश मंत्री रविन्द्र, विभाग प्रमुख डॉ. राकेश डंगवाल, प्रशांत अनुज कौशिक, मदन मोहन भारद्वाज, डॉ. हरीश रावत, गीतांजलि ढौंडियाल, बी.पी. खंडूरी, हरीश सकलानी, रविन्द्र डोभाल, सावित्री गुसाईं सहित अनेक पदाधिकारी एवं सहकारिता कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
दो दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग के सफल आयोजन पर सहकार भारती ने उत्तराखण्ड सरकार, सहकारिता विभाग, सभी विशेषज्ञ वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन “बिना संस्कार नहीं सहकार, बिना सहकार नहीं उद्धार” के उद्घोष के साथ हुआ। वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि यह प्रशिक्षण वर्ग उत्तराखण्ड में सहकारिता आंदोलन को नई दिशा, नई ऊर्जा और नई कार्यसंस्कृति प्रदान करेगा तथा एम-पैक्स ग्रामीण समृद्धि और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में और अधिक प्रभावी भूमिका निभाएंगे।
